
आलोट। छत्ताशाह वली दरगाह के पीछे का इलाका इन दिनों अवैध लकड़ी कारोबार का अड्डा बन चुका है, जहां हरे-भरे पेड़ों की बेरहमी से कटाई कर खुलेआम लकड़ियों का भंडारण किया जा रहा है। हालात इतने गंभीर हैं कि दिनदहाड़े मशीनों से पेड़ों को काटा जा रहा है और रात होते ही इन्हें क्रेन के जरिए बड़े ट्रेलों में भरकर बाहर भेज दिया जाता है। यह पूरा खेल बिना किसी डर और रोक-टोक के लगातार जारी है।

नगर के नागदा रोड, बरखेड़ा रोड, ताजली रोड, नागेश्वर रोड और बड़ोद रोड पर रोजा ना लकड़ियों से भरी ट्रैक्टर-ट्रॉलियां दौड़ती नजर आ रही हैं। आमजन के लिए यह अब रोज का दृश्य बन चुका है, लेकिन जिम्मेदार विभाग और प्रशासन की चुप्पी कई सवाल खड़े कर रही है। क्या यह सब उनकी नजरों से दूर है या फिर जानबूझकर अनदेखा किया जा रहा है?
स्थानीय लोगों का कहना है कि जिस स्थान पर पूर्व में प्रशासन कार्रवाई कर चुका है, वहीं दोबारा उसी स्तर पर अवैध गतिविधियां शुरू हो जाना यह साफ दर्शाता है कि माफियाओं के हौसले बुलंद हैं और उन्हें कानून का कोई भय नहीं रह गया है। खुलेआम कटाई, परिवहन और भंडारण यह संकेत देता है कि यह कारोबार पूरी तरह संगठित और योजनाबद्ध तरीके से संचालित हो रहा है।
शनिवार को शिशा खेड़ी रोड पर सड़क किनारे ही मशीनों से हरे पेड़ों की कटाई करते हुए वीडियो भी वायरल हुआ है, जिसने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है। अब सवाल यह उठता है कि जब सब कुछ खुलेआम हो रहा है, तो कार्रवाई क्यों नहीं?

पर्यावरण के दृष्टिकोण से यह स्थिति बेहद खतरनाक है। लगातार हो रही अंधाधुंध कटाई से न केवल क्षेत्र की हरियाली समाप्त हो रही है, बल्कि जलस्तर में गिरावट और प्राकृतिक संतुलन बिगड़ने का खतरा भी तेजी से बढ़ रहा है।
क्षेत्रवासियों में भारी आक्रोश है और वे लगातार मांग कर रहे हैं कि इस अवैध कारोबार पर तुरंत सख्त कार्रवाई हो, दोषियों पर कठोर कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जाए और संबंधित क्षेत्र में स्थायी निगरानी की व्यवस्था की जाए।

अब निगाहें प्रशासन पर टिकी हैं—क्या जिम्मेदार अधिकारी इस पूरे मामले को गंभीरता से लेकर तत्काल प्रभाव से कार्रवाई करेंगे या फिर हरियाली का यह खुला दोहन यूं ही चलता रहेगा?
