विधायक कमलेश्वर डोडियार के पत्र का का केंद्रीय मंत्री ने दिया आश्वासन मध्य प्रदेश, राजस्थान, गुजरात और महाराष्ट्र को मिला कर नए प्रदेश की संभावना
सैलाना

मध्य प्रदेश में रतलाम जिले की सैलाना विधानसभा सीट से विधायक कमलेश्वर डोडियार द्वारा चार राज्यों के भील-बाहुल्य क्षेत्रों को मिलाकर एक पृथक ‘भील प्रदेश’ बनाने की मांग को लेकर लिखे गए पत्र को लेकर देश के केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सैलाना विधायक को आधिकारिक पत्र लिखकर उनकी मांग और प्रस्ताव का संज्ञान लिया है।
अमित शाह ने कमलेश्वर डोडियार को भेजा आधिकारिक पत्र
विधायक कमलेश्वर डोडियार ने गत 14 जुलाई 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को भेजा था। इस पत्र के माध्यम से उन्होंने आदिवासी बहुल क्षेत्रों के समग्र विकास और एक अलग राज्य के गठन की मांग उठाई थी।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के हस्ताक्षर से जारी पत्र में इस बात की पुष्टि की गई है कि विधायक डोडियार का 14 जुलाई का पत्र प्राप्त हो गया है। जो भील बहुल क्षेत्रों के विकास और पृथक भील प्रदेश के गठन के संबंध में है।
केंद्रीय गृह मंत्री से आधिकारिक पत्र प्राप्त होने के बाद विधायक कमलेश्वर डोडियार ने भरोसा जताते हुए कहा कि उन्हें पूर्ण विश्वास है कि केंद्र सरकार देश के आदिवासियों, गरीबों और वंचित वर्ग के हितों को सर्वोपरि रखते हुए जल्द ही इस दिशा में सकारात्मक और न्यायोचित कदम उठाएगी।
विधायक कमलेश्वर डोडियार ने केंद्र सरकार को भेजे गए अपने ज्ञापनों में निम्नलिखित प्रमुख रूप से संविधान के अनुच्छेद-3 के तहत मध्य प्रदेश, राजस्थान, गुजरात और महाराष्ट्र के भील-बाहुल्य जिलों को मिलाकर एक नए राज्य का गठन किया जाए।
साथ ही इन क्षेत्रों की सामाजिक, आर्थिक, भौगोलिक और प्रशासनिक स्थितियों का अध्ययन करने के लिए केंद्र स्तर पर एक उच्चस्तरीय कमेटी बनाने की मांग भी की गई थी।
डोडियार ने आदिवासी युवाओं को उच्च शिक्षा और रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने के लिए क्षेत्र में AIIMS, IIT और IIM जैसे प्रतिष्ठित संस्थान खोले जाएं।
डोडियार ने अपने पत्र में नया राज्य बनने की प्रक्रिया पूरी होने तक शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, सिंचाई और सड़क जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए एक विशेष विकास पैकेज स्वीकृत करने पर जोर दिया था।
विधायक डोडियार ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा है कि आजादी के इतने दशक बीत जाने के बावजूद यह आदिवासी अंचल शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के मोर्चे पर काफी पिछड़ा हुआ है। स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसरों की कमी के चलते हर साल बड़ी संख्या में लोगों को मजबूरी में पलायन करना पड़ता है। कुपोषण और बदहाल स्वास्थ्य सेवाएं इस समाज की प्रगति में सबसे बड़ी बाधा हैं, जिन्हें दूर करने के लिए एक ठोस दीर्घकालीन कार्ययोजना की आवश्यकता है।




