
(रतलाम)। खरीफ सीजन से ठीक पहले देश के कृषि बाजारों में उस वक्त सन्नाटा छा गया, जब खाद, बीज और कीटनाशक कारोबार से जुड़े लगभग 5 लाख व्यापारियों ने एकजुट होकर अपनी ताकत का प्रदर्शन किया। एग्रो इनपुट डीलर्स एसोसिएशन (AIDA) के आह्वान पर सोमवार को कृषि आदान व्यापारियों ने एक दिवसीय देशव्यापी सांकेतिक हड़ताल कर केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम विस्तृत ज्ञापन सौंपकर अपनी वर्षों पुरानी मांगों को तत्काल पूरा करने की मांग की।
व्यापारियों का कहना है कि पिछले एक दशक से वे लगातार अपनी समस्याओं को सरकार के सामने रख रहे हैं, लेकिन हर बार आश्वासन के अलावा कुछ नहीं मिला। बढ़ती लागत, जटिल नियमों और कंपनियों की मनमानी के बीच अब उनका व्यवसाय संकट में आ गया है, जिससे नाराज होकर उन्होंने यह सख्त कदम उठाया है।
ज्ञापन में व्यापारियों ने साफ तौर पर सरकार को चेताया कि यदि समय रहते उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया गया, तो इसका खामियाजा पूरे कृषि क्षेत्र को भुगतना पड़ेगा। प्रमुख मांगों में खाद कंपनियों द्वारा जबरन लिंकिंग (टैगिंग) पर रोक लगाना, उर्वरकों की FOR (Free On Road) आपूर्ति सुनिश्चित करना, डीलर मार्जिन को बढ़ाकर न्यूनतम 8 प्रतिशत करना और साथी (SATHI) पोर्टल की अनिवार्यता में राहत देना शामिल है।
इसके अलावा अवैध बीजों की बिक्री पर नियंत्रण, विक्रेताओं को ‘साक्षी’ का दर्जा, एक्सपायर्ड कीटनाशक स्टॉक की अनिवार्य वापसी, लाइसेंस प्रक्रिया को सरल बनाने, झूठी शिकायतों की जांच के लिए कमेटी गठन और छोटी त्रुटियों पर निलंबित लाइसेंस की शीघ्र बहाली जैसी मांगों को भी प्रमुखता से उठाया गया है।
कृषि आदान विक्रेता संघ आलोट के अध्यक्ष पवन मेहता सहित पदाधिकारियों ने दो टूक शब्दों में कहा कि यदि आगामी एक माह में उर्वरक एवं रसायन मंत्रालय और केंद्रीय कृषि मंत्रालय द्वारा ठोस समाधान नहीं दिया गया, तो खरीफ सीजन से पहले अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू की जाएगी।
व्यापारियों ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि आंदोलन लंबा खिंचता है, तो इसका सीधा असर किसानों और कृषि उत्पादन पर पड़ेगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।


