
आलोट। राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के अवसर पर शासकीय महाविद्यालय आलोट में आयोजित कार्यक्रम में विद्यार्थियों के बीच वैज्ञानिक चेतना, नवाचार और भारतीय ज्ञान परंपरा पर केंद्रित विचार विमर्श हुआ। मुख्य वक्ता के रूप में महावीर विद्यालय आलोट के प्राचार्य मनोज शर्मा ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि भारत की प्राचीन ज्ञान–विज्ञान परंपरा अत्यंत समृद्ध रही है और आधुनिक विज्ञान की कई अवधारणाओं के मूल तत्व हमारे शास्त्रों एवं सांस्कृतिक ग्रंथों में पूर्व से ही निहित रहे हैं।

उन्होंने हनुमान चालीसा की प्रसिद्ध चौपाई जुग सहस्त्र योजन पर भानु, लील्यो ताहि मधुर फल जानू का उल्लेख करते हुए कहा कि इसमें वर्णित सूर्य–पृथ्वी की दूरी आधुनिक वैज्ञानिक गणनाओं से साम्य रखती है।
रामसेतु निर्माण का उदाहरण देते हुए उन्होंने नल–नील को प्रारंभिक सिविल इंजीनियरिंग का प्रतीक बताया और कहा कि प्राचीन भारत में तकनीकी दक्षता और संगठन क्षमता का अद्भुत समन्वय देखने को मिलता है। भगवान गणेश के स्वरूप का संदर्भ देते हुए उन्होंने प्राचीन शल्य चिकित्सा ज्ञान की ओर ध्यान आकृष्ट किया और कहा कि वैदिक काल में चिकित्सा विज्ञान एवं शरीर रचना संबंधी समझ अत्यंत उन्नत थी। प्राचीन वैद्यों द्वारा की गई शल्य क्रियाओं को आधुनिक प्लास्टिक सर्जरी की आधारभूमि के रूप में देखा जा सकता है।
उन्होंने मंत्र-विज्ञान, यज्ञ एवं प्राकृतिक प्रक्रियाओं के संबंध पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भारतीय परंपराओं में प्रकृति के संतुलन को बनाए रखने की स्पष्ट दृष्टि मिलती है।
विज्ञान और संस्कृति के संतुलित समन्वय से ही समाज का समग्र विकास संभव है। कार्यक्रम के अंत में विद्यार्थियों से नवीन आविष्कार, शोध और नवाचार की दिशा में आगे बढ़ने का आह्वान करते हुए उन्होंने कहा कि रुचि और समर्पण के साथ किया गया प्रयास व्यक्तिगत सफलता के साथ-साथ संस्थान और क्षेत्र की प्रतिष्ठा भी बढ़ाता है।
कार्यक्रम में महाविद्यालय के प्राचार्य ऋषि कुमार शर्मा, प्राध्यापक सोलंकी एवं गुप्ता ने अतिथियों का स्वागत किया। इस अवसर पर प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को प्रमाण पत्र एवं पारितोषिक प्रदान कर सम्मानित किया गया। अंत में उपस्थित प्राध्यापकों एवं विद्यार्थियों के प्रति आभार व्यक्त किया गया।
