आलोट। शासकीय आरोग्यम उप स्वास्थ्य केंद्र निर्माण में सामने आए भ्रष्टाचार और गंभीर अनियमितताओं के मामले में एसडीएम द्वारा जांच टीम गठित किए जाने के बावजूद अब तक न तो जांच रिपोर्ट सार्वजनिक हुई है और न ही किसी जिम्मेदार पर कार्रवाई की गई है। जांच दल बनने के बाद भी रिपोर्ट शून्य रहने से पूरे प्रकरण पर लीपापोती के आरोप लगने लगे हैं।
उल्लेखनीय है कि रतलाम जिले के आलोट विकासखंड अंतर्गत ताल तहसील की ग्राम पंचायत बरखेड़ा खुर्द में निर्माणाधीन आरोग्यम स्वास्थ्य केंद्र में शासन से प्राप्त सीमेंट एवं अन्य निर्माण सामग्री के कथित दुरुपयोग का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। वीडियो में सरकारी सीमेंट की बोरियों को चोरी-छुपे बाहर बेचने के दृश्य सामने आए थे, जिसे लाखों लोगों ने देखा और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। वीडियो वायरल होने के बाद ग्रामीणों ने आलोट एसडीएम कार्यालय पहुंचकर लिखित शिकायत दी थी।
शिकायत में आरोप लगाया गया था कि निर्माण कार्य में घटिया सामग्री का उपयोग किया जा रहा है, तय मापदंडों की अनदेखी हो रही है और शासन की सामग्री को निजी लाभ के लिए खुले बाजार में बेचा जा रहा है। ग्रामीणों का कहना था कि यह गड़बड़ी ठेकेदार, पंचायत और जिम्मेदार अधिकारियों की मिलीभगत से लंबे समय से चल रही थी, जो वीडियो सामने आने के बाद उजागर हुई।
मामले की गंभीरता को देखते हुए एसडीएम द्वारा तीन सदस्यीय जांच दल गठित कर भौतिक सत्यापन, स्टॉक रजिस्टर मिलान और निर्माण गुणवत्ता की जांच के निर्देश दिए गए थे। जांच दल द्वारा जांच किए जाने की बात कही गई, लेकिन कई दिन बीत जाने के बाद भी न तो जांच रिपोर्ट सार्वजनिक की गई और न ही किसी स्तर पर जवाबदेही तय की गई है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब जांच टीम गठित कर दी गई है तो फिर रिपोर्ट कहां है। क्या जांच केवल औपचारिकता बनकर रह गई है या दोषियों को संरक्षण देने की कोशिश की जा रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि स्वास्थ्य केंद्र जैसे जनहित से जुड़े निर्माण कार्य में भ्रष्टाचार कर शासकीय धन का दुरुपयोग किया गया है, लेकिन प्रशासन की सुस्ती से दोषियों के हौसले बुलंद हैं।
ग्रामीणों और सामाजिक संगठनों ने मांग की है कि जांच रिपोर्ट को तत्काल सार्वजनिक किया जाए, दोषी पाए जाने वाले ठेकेदार, पंचायत प्रतिनिधियों और संरक्षण देने वाले अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई हो तथा भविष्य में ऐसे मामलों की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।
अब पूरे क्षेत्र की निगाहें प्रशासन पर टिकी हैं कि वह भ्रष्टाचार के इस मामले में निष्पक्ष और पारदर्शी कार्रवाई करता है या यह मामला भी अन्य मामलों की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगा।



